Immune system kya hai | Immune system kaise kaam karta hai ||

आप सभी ने कोरोना वायरस के चलते यह तो सुना ही होगा की उसकी अभी तक दवाई नहीं बनी है, और इसे केबल हमारा Immune system ही ठीक कर सकता है। जिसका इम्यून सिस्टम स्ट्रांग होगा उसे यह वायरस ज्यादा नुक्सान नहीं पहुंचाएगा वह ठीक हो सकता है। वंही आपने यह भी सुना और देखा है की बचो और बूड़ो पर यह घातक सिद्ध हो रहा है क्यूंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। क्या आपको पता है Immune system kya hai । Immune system kaise kaam karta hai ।।

Immune system kya hai | Immune system kaise kaam karta hai ||Immune system kya hai | Immune system kaise kaam karta hai ||हमारा शरीर सिर्फ एक हडी और मांसपेशियों से बना शरीर नहीं है बल्कि यह खुद में एक करिश्मा है। हमारे शरीर के अंदर पूरा का पूरा मिल्ट्री जोन होता है जाँह गॉर्ड, Inelegance टीम, बैकअप टीम, वेपन फैक्टरी, communicators ऐसी बहुतसी चीजे है हमें प्रोटेक्ट करने के लिए, इसे collectively हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम कहते है, यानि रोग-प्रतिरोगता क्षमता।

Immune system kya hai । Immune system kaise kaam karta hai ।। IN DETAILS ।।

Video source youtube: FactTechz

Immune system kya hai – what is immunity in Hindi :

इम्यून सिस्टम हमारी बॉडी का डिफेंस सिस्टम होता है, इम्यून सिस्टम हमारे शरीर को बाहरी पार्टिकल जैसे, वायरस, बेक्टेरिआ, फंगल, या ऐसी कोई चीज जो हमारे शरीर को नुक्सान पहुंचा सकती है उसके अगेंस्ट यह हमें प्रोटेक्ट करता है। इसलिए हम इसे हमारी बॉडी का डिफेंस सिस्टम भी कहते है।

साधारण शब्दों में कहे तो जितने भी वेक्टेरिआ, वायरस आदि होते है उनसे हमारे शरीर की रक्षा करने के लिए जो सिस्टम होता है, उसे हम Immune system कहते है।

Immune system kya hai | Immune system kaise kaam karta hai ||

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immune system types in Hindi :

हमारे शरीर में immune system two types का होता है,

  1. Innate या Nonspecific immune system
  2. Acquired या specific immune system

1. Nonspecific या Innate immune system kya hai :

Innate immune system यह हमारे शरीर में आने बाली सभी बाहरी पार्टिकल कल के लिए होता है इसलिए इसे Nonspecific immune system भी कहते है। यह नेचुरल और हमारे शरीर में जन्म से ही होता है। इसे हम फर्स्ट लाइन ऑफ़ डिफेन्स भी कहते है। Innate immune system के अंतर्गत भी दो सीस्टम आते है।

  • External Barrier: हम बात कर रहे बाहरी पार्टिकल की जो की कुछ भी हो सकता है जैसे बेक्टेरिअ, वायरस, तो सबसे अहले यह हमारे शरीर के बाहरी स्किन आदि में लगते है। External Barrier इन्हे हमारे स्किन या हमारे शरीर के अंदर प्रवेश करने से रोकता है। यह हमारे स्किन में epithelial जैसे सेल External Barrier का काम करते है जो हमारे शरीर में वायरस और वेक्टेरिआ आदि को प्रवेश करने से रोकता है।

हमारे शरीर में जो भी एंट्री पॉइंट होते है जैसे मुँह, नाक, कान आदि में भी एक mucous layer होती है जो हमें वायरस आदि को हमारे शरीर में प्रवेश करने से रोकती (प्रोटेक्ट) करती है।

  •  Inner defense components : जब कोई वेक्टेरिया या वायरस हमारे शरीर में बने External Barrier को तोड़ के हमारे शरीर में घुस जाता है तो उस वक्त Inner defense components एक्टिव हो जाते है उस वायरस को मारने के लिए। Inner defense components को हम 2nd लाइन ऑफ़ डिफेन्स भी कहते है।

Inner defense components immune system में 5 प्रोसेस होती है किसी वायरस को मारने के लिए।

  • Phagocytes : जब कोई वायरस हमारे शरीर में External Barrier को तोड़ के अंदर प्रवेश करते है तो सबसे पहले Phagocytes एक्टिव होता है यह एक प्रकार का white blood call होता है जो उस वायरस वैक्ट्रिया को अपने भीतर समाहित कर लेता है और लिसोंजाइम की मदत से पचाता है और वह वायरस किल हो जाता हो और सेल मेमरेन के द्वारा इसे बहार निकल दिया जाता है।
  •  Natural Killer Cell (NK cells) : जब हमारे शरीर का सेल किसी वायरस के कारन इन्फेक्टेड हो जाता है तो यह Natural Killer Cell एक्टिव हो जाता है। virus और इन्फेक्टेड सेल में glycoprotein होते है जिससे Natural Killer Cell अटैच होते है और परफोरियन नामक सूबटन्स रिलीज़ होता है और यह वायरस और उससे इन्फेक्टेड सेल को किल कर देते है।
  • Inflammation : किसी इंजरी के चलते जब कोई वेक्टेरिआ हमारे शरीर घुसता है तो नइट्रिफिल्स मइक्रोव्स (वेक्टेरिआ , वायरस आदि) को किल करता है और मोनोसैट phagocytes में कन्वर्ट होक उसे पाचन करता है।
  •  Fever : हमारे शरीर का तापमान 37 डिग्री सेंटीग्रेट होता है, जब हमारे शरीर का तापमान इससे अधिक होता है तो उसे फीवर कहते है यह तब होआ जब कोई मइक्रोव्स हमारे शरीर में होता है और उसे किल करते वक्त बहुत सी प्रोसेस होती है और शरीर का तापमान पद जाता है ताकि उस बाहरी मिक्रोवेस यानि वायरस को किल सके।
  •  Antimicrobial Substance : ऐसा सब्सटांस जो एक्सटर्नल मइक्रोव्स को फैलने से रोकता हो उसे हम Antimicrobial Substance कहते है।

Acquired या specific immune system

अधिग्रहित प्रतिरक्षा आपके जीवनकाल में विकसित होने वाली प्रतिरक्षा है।

याँह से आ सकता है:

  • a vaccine
  • exposure to an infection or disease
  • another person’s antibodies (infection-fighting immune cells)

जब आपके शरीर में रोगाणु (रोगाणु) एक वैक्सीन या एक बीमारी से शुरू होते हैं, तो आपका शरीर भविष्य में नए रोगाणु बनाकर उन कीटाणुओं को लक्षित करना सीखता है।

किसी अन्य व्यक्ति से एंटीबॉडी भी आपके शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकती हैं – लेकिन इस प्रकार की प्रतिरक्षा अस्थायी है।

एक्वायर्ड इम्युनिटी जन्मजात इम्युनिटी से अलग होती है, जिसका आप जन्म लेते हैं। आपकी जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली विशिष्ट कीटाणुओं से नहीं लड़ती है।

इसके बजाय, यह बैक्टीरिया और वायरस जैसे सभी कीटाणुओं से बचाता है, उन्हें आपके शरीर में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश करता है। आपकी जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली में इस तरह की चीजें शामिल हैं:

  • your cough reflex
  • stomach acid
  • your skin and its enzymes
  • mucus

यदि रोगजनकों आपके जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली में बाधाओं के माध्यम से प्राप्त करते हैं, तो आपके प्रतिरक्षा प्रणाली के बाकी हिस्सों में विशिष्ट एंटीबॉडी को उनसे लड़ने के लिए जुटाने की आवश्यकता होती है।

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active और passive immunity के बीच अंतर क्या है?

सक्रिय प्रतिरक्षा और निष्क्रिय प्रतिरक्षा अधिग्रहित प्रतिरक्षा के दो प्रकार हैं।

  • Active immunity: सक्रिय प्रतिरक्षा सबसे आम प्रकार है। यह एक संक्रमण या टीकाकरण की प्रतिक्रिया में विकसित होता है। ये तरीके आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को एक प्रकार के रोगाणु या रोगज़नक़ (टीकाकरण में, बस थोड़ी मात्रा में) के लिए उजागर करते हैं।

टी और बी कोशिकाओं नामक प्रतिरक्षा कोशिकाएं वहां “आक्रमणकारी” रोगज़नक़ को पहचानती हैं और इससे लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करती हैं।

अगली बार जब टी और बी प्रतिरक्षा कोशिकाएं उस विशिष्ट रोगाणु का सामना करती हैं, तो वे इसे पहचान लेंगे और आपको बीमार होने से बचाने के लिए तुरंत अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर देंगे।

  • Passive immunity: जब आप किसी या कहीं और से एंटीबॉडी प्राप्त करते हैं तो निष्क्रिय प्रतिरक्षा विकसित होती है। इस प्रकार की प्रतिरक्षा अल्पकालिक है, क्योंकि यह आपके प्रतिरक्षा प्रणाली को भविष्य में रोगज़नक़ को पहचानने का कारण नहीं बनता है।

passive immunity के दो मुख्य प्रकार हैं:

Maternal antibodies हैं जो एक मां से बच्चे में स्थानांतरित होती हैं। यह आमतौर पर नाल के पार या स्तन के दूध के माध्यम से होता है, खासकर जन्म के बाद पहले कुछ दिनों में।

Immunoglobulin treatments हैं जो आमतौर पर संक्रमण के लिए जोखिम वाले लोगों का इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे कि सर्पदंश के बाद या हेपेटाइटिस बी के साथ मां से पैदा हुआ बच्चा। ये एंटीबॉडी एक प्रयोगशाला में बने होते हैं, या अन्य लोगों या जानवरों से आते हैं।

immunity के natural and artificial sources के बीच क्या अंतर है?

प्रतिरक्षा के प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों स्रोत सक्रिय या निष्क्रिय हो सकते हैं।

प्राकृतिक स्रोत आपकी प्रतिरक्षा को बढ़ाने के लिए विशेष रूप से आपको नहीं दिए जाते हैं। इसके बजाय, वे कुछ ऐसे प्राकृतिक तरीकों से हासिल करते हैं, जैसे जन्म के समय संक्रमण या अपनी माँ से।

प्रतिरक्षा के कृत्रिम स्रोत आपको एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए दिए गए हैं। वे टीकाकरण या इम्युनोग्लोबुलिन उपचार शामिल हैं।

प्रतिरक्षा क्यों महत्वपूर्ण है?

आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली आपको यह पता लगाने में मदद करती है कि जब आपके शरीर में कोई हानिकारक चीज प्रवेश करती है, तो आप उसे स्वस्थ रखते हैं और फिर इससे लड़ते हैं ताकि आप बीमार न हों। आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली जितनी मजबूत होगी, आपके स्वस्थ रहने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली:

  • attacks viruses and bacteria that can make you sick
  • helps heal wounds
  • causes inflammation when it needs to, such as a fever to help get rid of a general infection
  • stops long-term इन्फ़्लम्मतिओं

Acquired immunity आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है। उदाहरण के लिए, टीके, आपकी रोग प्रतिरोधक प्रणाली को कम मात्रा में रोगज़नक़ों को उजागर करते हैं, जो आपको बीमार नहीं बनाते।

आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली सीखती है कि उन कीटाणुओं को कैसे पहचाना जाए, इसलिए अगली बार जब उनका सामना होगा, तो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को पता चलेगा कि प्राकृतिक रूप से कैसे लड़ना है।

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